हाय यह रोटी




हाय यह रोटी 

अच्छाई की जड़ है रोटी 

बुराई की जड़ है रोटी 


करती है कुकर्म को प्रेरित 

चोरी डकैती हत्या को उद्यत

गर रोटी पेट में है तो

सारा जहां खूबसूरत 

 रोटी नहीं है पेट में तो

 सारा वैभव बदसूरत है।


दो जून की रोटी के लिए ही तो 

खपता है आदमी सुबह से शाम तक 

भरता है पेट कहीं मुश्किल से तब 

काश रोटी तू ना होती तो 

यह चोरी डकैती क्यों होती ?


बुराई की जड़ है रोटी 

अच्छाई की जड़ है रोटी 


आशा जाकड़

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