स्वाध्याय से आत्मा का कल्याण होता हैं -आर्यिका श्री महायश मति माताजी
बांसवाड़ा| आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का संघ कमर्शियल कॉलोनी बांसवाड़ा में संघ सहित विराजित है आचार्य श्री की शिष्या आर्यिका श्री महायशमति माताजी ने उपदेश में स्वाध्याय क्यों किया जाता है, स्वाध्याय का जीवन में क्या लाभ है ,स्वाध्याय से जीवन में क्या परिवर्तन आता है ,इस पर अपना उपदेश दिया माताजी ने प्रवचन में बताया कि स्वाध्याय करने के बिना जीवन अधूरा है। स्वाध्याय का शाब्दिक अर्थ देखें तो आत्मा में ज्ञान की प्राप्ति होना स्वाध्याय है। आत्मा जो राग द्वेष , क्रोध्र मान माया लोभ पंचेेंद्रीय विषय भोगों कर्ण कर्मों से बंधी है ।आत्मा से कषाय और कर्म कैसे कम हो ,कैसे कर्मों का नाश हो यह स्वाध्याय करने से प्राप्त होता है। स्वाध्याय से आत्मा का कल्याण होता है।संसारी प्राणी का जीवन कष्ट और दुख में है वह सुख की खोज कर रहे हैं भगवान के उपदेश को जीवन में नहीं उतर रहे हैं स्वाध्याय से आत्मा में ज्ञान की प्राप्ति होती है इससे जीवन में परिवर्तन होता है इसलिए आगम प्रणित प्राचीन ग्रंथ जो पूर्वाचार्य ने लिखे हैं उनका प्रतिदिन स्वाध्याय करना चाहिए आज के मानव का जीवन समाचार पत्र और मोबाइल से होता है इनमें मोबाइल देखने समाचार देखने पढ़ने से आत्मा का कल्याण नहीं होता है आत्मा का कल्याण धार्मिक ग्रंथो के स्वाध्याय से होता है ।स्वाध्याय से भेद विज्ञान प्राप्त होता है कि आत्मा अलग है, शरीर अलग है स्वाध्याय से मन पर नियंत्रण होता है हिमांशु जैन अनुसार माताजी ने आगे बताया कि आज का तापमान 50 डिग्री से भी अधिक है आप कहते हैं महाराज माता जी इतनी गर्मी में बगैर पंखे कूलर ऐसी के कैसे रह रहे हैं ,जब साधु को आत्मा और शरीर का भेद विज्ञान हो जाता है तो वह शरीर को आत्मा का पड़ोसी मानते हैं इस कारण वह संसार शरीर के विषय भोगों के प्रति उदासीन रहते हैं ।स्वाध्याय से गृहस्थ हिंसा से बचते हैं स्वाध्याय से जीवन अच्छा बन , कल्याण कर, जीवन का नया निर्माण होता है। स्वाध्याय से वैराग्य भाव बढ़ता है दीक्षा लेना ही वैराग्य नहीं है छोटे-छोटे व्रत नियम भी लेने से मन बैरागी बनता है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने मात्र 19 वर्ष की युवा अवस्था में सीधे मुनि दीक्षा ली थी आपके जन्म के पूर्व 12 भाई बहनों का निधन हो गया था। माता के निधन के बाद पिता और छोटा भाई जीवित होने पर जीवन की नश्वरता को समझ कर दीक्षा सन 1969 में ली उस समय अनेक लोगों ने ,विद्वानों ने कहा कि युवा यशवंत जी को मुनि दीक्षा मत दो आचार्य श्री ने कहा ठीक है आपकी उम्र हो गई है आप आ जाओ मैं आपको दीक्षा देता हूं। इसलिए जीवन में वैराग्य आना चाहिए एक सफेद बाल के देखने वाले जीव दीक्षा ले लेते हैं। भोजन की थाली में सफेद चावल आने पर भोजन समाप्ति का सूचक होता है, युद्ध में सफेद झंडा लहराने पर युद्ध समाप्त हो जाता है आपके शरीर के सफेद बाल भी आपको वानप्रस्थ होने का संकेत दे रहे हैं। स्वाध्याय से मैत्री भाव बढ़ता है स्वाध्याय से ज्ञान में वृद्धि होकर कषाय , पापों और कर्मों का नाश होता है।
राजेश पंचोलिया इंदौर