गणाचार्य श्री विराग सागर जी के शिष्य स्थविर मुनि श्री विहित सागर जी महाराज का समाधि मरण
बुंदेलखंड के प्रथमाचार्य, राष्ट्रसंत, भारत गौरव, उपसर्ग विजेता, गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज के परम प्रभावक सुयोग्य शिष्य एवं मूल संघ के प्रमुख स्थविर मुनि श्री 108 विहित सागर जी महाराज का दिनांक 24 दिसम्बर 2024 को दोपहर 3 बजकर 3 मिनट पर समता पूर्वक त्यागी भवन सताणा में समाधिमरण हो गया है। 25 दिसम्बर 2024 प्रातः 8 बजे त्यागी भवन से पावन खिण्ड परिसर के लिए डोला निकलेगा।
मीडिया प्रभारी भरत सेठ पत्रकार घुवारा ने उक्त जानकारी दी है और भारतवर्ष के समस्त धर्मावलंबी महानुभावों से अधिक से अधिक संख्या में डोला में सम्मिलित होकर धर्म लाभ अर्जित करने की अपील की है।
गुरु शिष्य का नाता अमर कर दिया छपकराज मुनि श्री विहित सागर जी महाराज ने
घुवारा/ (भरत सेठ पत्रकार ) बुंदेलखंड के प्रथमाचार्य, राष्ट्रसंत, भारत गौरव, उपसर्ग विजेता, समाधिस्थ गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज के परम प्रभावक सुयोग्य शिष्य स्थविर मुनि छपकराज विहित सागर जी महाराज गणाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज के मूल संघ के प्रमुख एवं ज्येष्ठ मुनि श्री 108 विहित सागर जी महाराज हमेशा मुस्कुराते हुए संघ में समस्त आगंतुक साधर्मी जनों से हमेशा एक ही बात अक्सर पूछते आपके यहां कौन से महाराज माताजी हैं अच्छे से सेवा व्यवस्था करना। आपने भोजन किया ठहरने की व्यवस्था हुई पूछते थे। हर जगह मंदिर तीर्थ क्षेत्रों के जीर्णाेद्धार विकास के लिए तत्पर रहते विशेष रूचि थी।
मुनि श्री विहित सागर जी महाराज का गुरु विरागसागर जी महामुनिराज के प्रति अपूर्ण समर्पण सेवा भाव था 24 घंटे आपकी आंखें गुरुदेव को निहारतीं रहतीं।
गुरु के पास पहुंचने मोक्ष महल की उत्तम भावना के साथ आप निरंतर त्याग बढ़ाते गये, उपवास बढ़ाते गये 24 घंटे कठिन साधना में लीन रहकर चारों प्रकार के आहार जल का त्याग कर गुरु की उत्कृष्ट समाधि को स्मरण करते हुए आज 24 दिसंबर दोपहर 3 बजकर 3 मिनट पर त्यागी भवन सताणा
जिला नासिक महाराष्ट्र में उत्तम सल्लेखना समाधि मरण को प्राप्त हो गए।
पूरे भारतवर्ष की जैन समाज को गुरु शिष्य के अमर नाता पर नाज रहेगा। मुनि श्री 108 विहित सागर जी महाराज को निश्चित ही मोक्ष मार्ग की प्राप्ति हुई है मुनि श्री को कोटि-कोटि नमोस्तु।
छपकराज स्थविर मुनि श्री 108 विहित सागर जी महाराज का
जीवन परिचय
पूर्व नाम-श्री अनिल कुमार जैन
ग्राम - गोटेगांव जबलपुर मध्य प्रदेश
पिता का नाम-श्री शिखर चंद जी
माता का नाम-श्रीमति गिन्दी बाई
जन्म-10/12/1957
शिक्षा-मिडिल क्लास
परिवार-3 भाई 2 बहन
वैराग्य-आचार्य श्री सानिध्य वैयावृति
ब्रह्मचर्य व्रत-1982 दुर्ग
क्षुल्लक दीक्षा-28/01/1995
मंगलगिरी सागर
नाम-विहित सागर जी
ऐलक दीक्षा-25/06/1998
शैरीपुर लंकेश्वर
मुनि दीक्षा-14/12/1998
वरासो अतिशय क्षेत्र
नाम-मुनि विहित सागर जी
दीक्षा गुरु-परम पूज्य गणाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज
संलेखना व्रत-17/12/2024 सताणा
सानिध्य -गणधर मुनी विवर्धन सागर जी महाराज, प्रवर्तन मुनि विश्व नायक सागर जी महाराज